राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की 100 वर्ष की राष्ट्रसेवा यात्रा के उपलक्ष्य में आज स्थानीय रवींद्रनाथ टैगोर सांस्कृतिक भवन में एक प्रमुख जन गोष्ठी का आयोजन किया गया।

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*प्रमुख जन गोष्ठी* 

दिनांक: 29.01.2026

स्थान: रवींद्रनाथ टैगोर सांस्कृतिक भवन,विदिशा (म.प्र.)

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की 100 वर्ष की राष्ट्रसेवा यात्रा के उपलक्ष्य में आज स्थानीय रवींद्रनाथ टैगोर सांस्कृतिक भवन में एक प्रमुख जन गोष्ठी का आयोजन किया गया। जनगोष्ठी का उद्देश्य संघ के शताब्दी कालखंड में समाज, राष्ट्र और संस्कृति के क्षेत्र में दिए गए योगदान पर विचार-विमर्श करना रहा।

कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सह बोद्धिक शिक्षण प्रमुख माननीय श्री दीपक जी बिस्पुते तथा साथ में माननीय विभाग संघ चालक माननीय सुरेश जी देव एवं माननीय जिला संघचालक माननीय खुमान सिंह जी रघुवंशी जी सम्मिलित हुये।

मुख्य वक्ता माननीय श्री दीपक जी बिस्पुते ,अखिल भारतीय सह बौद्धिक प्रमुख ने अपने उद्बोधन में कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने अपने स्थापना काल से ही राष्ट्र निर्माण,सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक जागरण एवं सेवा कार्यों को प्राथमिकता दी है। संघ की यह 100 वर्ष की यात्रा समर्पण, अनुशासन और राष्ट्र प्रथम की भावना से प्रेरित रही है, अपने वक्तव्य में उन्होंने स्वामी विवेकानंद जी के व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला , उन्होंने कहा कि संघ का कार्य केवल संगठन तक सीमित न होकर समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचने का प्रयास है। उन्होंने स्व आधारित भाषा,भूसा,भोजन,भजन,भवन एवं भ्रमण नैतिक मूल्य पर प्रकाश डालते हुए 

उन्होंने कहा राष्ट्र निर्माण केवल संस्थाओं से नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक के संस्कार, कर्तव्यबोध और सामाजिक समरसता से ही होता है। उन्होंने समाज में एकता, आत्मनिर्भरता और सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण पर विशेष बल दिया।

 हिंदू समाज के उत्थान तथा जातिगत भेदभाव से ऊपर उठकर सिर्फ हिंदुत्व की भावना रखने पर जोर दिया, साथ ही हिंदू समाज में व्याप्त अव्यवस्थाओं पर प्रकाश डालते हुए सुधारात्मक प्रयासों पर विचार व्यक्त किए। समाज एवं उसके नागरिक स्वयं जागरूक तथा क्रियाशील होकर अपने गांव, अपने शहर, अपने मोहल्ले में सुधार का प्रयास कर पर्यावरण संरक्षण एवं स्वच्छता को आपने जीवन में उतारने पर जोर दिया।

श्री सह बौद्धिक शिक्षण प्रमुख जी ने युवाओं से आह्वान किया कि वे राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए सामाजिक कार्यों में सक्रिय भागीदारी निभाएँ और सकारात्मक परिवर्तन के वाहक बनें। गोष्ठी के दौरान समसामयिक राष्ट्रीय विषयों पर भी सार्थक चर्चा हुई।

श्री सह बौद्धिक प्रमुख जी ने प्रबुद्ध जनों से आग्रह किया कि वे सेवा के माध्यम से दीपक बनकर समाज को सशक्त बनाने के लिए निरंतर प्रयास करें और एकजुट होकर सेवा भाव से कार्य करें। समाज में सेवा का कार्य कर रहे सभी प्रबुद्धजन समाज के लिए प्रेरणा हैं। उनका योगदान समाज को नई दिशा और सीख देता है। भारत की विशेषता यह है कि यहां सेवा हमेशा कर्तव्य के रूप में रही है। उन्होंने कहा कि सेवा सहज नहीं होती। बिना करुणा के सेवा संभव नहीं है। आज भारत विश्व में आगे बढ़ रहा है। हम एक तरफ समृद्धि के शिखर की ओर बढ़ रहे हैं, वहीं कई ऐसे क्षेत्र हैं जहां कार्य करने की आवश्यकता है। इस कमी को हमारे प्रबुद्धजनों को पूरा करना है। भारत की दृष्टि सेवाभावी है और हमें एकजुट होकर समाज के विभिन्न क्षेत्रों में काम करना चाहिए है। हमारे यहां अर्थ जगत को प्रतिष्ठा नहीं है, हमारे यहां सेवा, समर्पण, त्याग और तपस्या की प्रतिष्ठा है। हमारी संस्कृति कहती है कि प्रत्येक मनुष्य में परमात्मा का अंश है। इसलिए समाज को प्रत्येक मनुष्य की चिंता करनी चाहिए।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में प्रबुद्धजन, सामाजिक कार्यकर्ता, युवा वर्ग एवं मातृशक्ति एवं शहर के गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। अंतिम सत्र में प्रबुद्धजन ki जिज्ञासा समाधान श्री दीपक जी द्वारा किया गया |

गोष्ठी के समापन में छोटे बालक बालिकाओं द्वारा राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् का का मधुर गायन किया।

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