April 19, 2021

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एडमायर थियेटर गुप के पांच दिवसीय फेसबुक ऑनलाइन नाट्य समारोह में चोथे दिन नाटक-बैयसाखी का मंचन हुआ जिसके निर्देशक-आनंद मिश्रा लेखक-योगेश त्रिपाठी प्रस्तुति-सघन सोसायटी की थी .

एडमायर थियेटर गुप के पांच दिवसीय फेसबुक ऑनलाइन नाट्य समारोह में चोथे दिन नाटक-बैयसाखी का मंचन हुआ

हमारे समाज में कई परिवारों में देखा गया है कि उनकी तरक्की में बेटियों का बड़ा योगदान रहा है। ऐसे ही एक निरक्षर परिवार की यह कहानी है, जिसमें पारंपरिक पिता और प्रगतिशील मां है। मां के सख्त अनुशासन से बेटी पढ़ाई कर रही होती है, तभी एक दुर्घटना में वह विकलांग हो जाती है। इसके बावजूद उसका आत्म विश्वास कम नहीं होता और वह एक वाकया आने पर अपने पिता को, निरक्षरता की अपमानजनक स्थिति से उबारती है। ग्रामीण परिवेश का यह नाटक, सहज सरल बघेली में लिखा गया है साथ ही इसमें गीत संगीत भी है।नाटक में छोटे लाल गरीब अनपढ़ किसी प्रकार से अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहा हैं उसकी बेटी की शादी दूसरे गांव के प्रधान के यहां तय होती हैं वर पक्ष को लड़की अच्छी चाहिए भले ही लड़का अवगुणी हो लेकिन भाग्य में कुछ ओर ही लिखा हैं छोटे लाल की बेटी परान कुएं में गिर जाती हैं जिस कारण उसका पैर टूट जाता हैं तब छोटे लाल उसके इलाज के लिए कर्ज लेकर इलाज कराता हैं प्रधान द्वारा संदेश भेजा जाता हैं कि विकलांग लड़की को वह अपनी बहु नहीं बनाएंगे ओर कर्ज के लिए मिठाई तकादा करता हैं।छोटे लाल बैंक जाता हैं वहां उसका कोई फ़ार्म नहीं भरता साथ ही उसका बहुत अपमान किया जाता हैं इससे आहात होकर वह परान के पास आता हैं परान अपने पिता को पढ़ाने का फैसला लेती हैं ओर साक्षर बनाती हैं ओर अपने पिता को बैंक ले जाकर स्वयं उनसे फ़ार्म भरवाकर खाता खुलवाती हैं।