November 29, 2021

vedicexpress

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खाद-बीज के संकट के बाद अब खेतों में सिंचाई के लिए पानी को तरसे किसान

जिले के किसानों को पहले जहां बोवनी के लिए खाद-बीज का संकट सहना पड़ा, वहीं अब सिंचाई के पानी के लिए भी किसान तरस रहे हैं। ये हालात कमांड एरिया में देखने को मिल रहे हैं। संजय सागर बांध का पानी 17 तारीख को छोड़ा गया था लेकिन नहरों की सफाई और मरम्मत नहीं होने से कई गांवों तक पानी नहीं पहुंच सका है। टेल क्षेत्र में नहरें कहीं टूटी पड़ी हैं, तो कहीं बड़ी-बड़ी घास और झाड़ उगे हुए हैं।

इतना ही नहीं नहरों में मिट्टी और अन्य मलबा भी पानी के फ्लो में बाधा डाल रहा है। नहरों की साफ-सफाई और मरम्मत नहीं होने के कारण किसानों में आक्रोश है। अकेले संजय सागर बांध की नहरों की यह स्थिति नहीं है बल्कि हलाली बांध की भी कई नहरों की सफाई और मेंटनेंस नहीं किया गया है।

संबंधित बांध परियोजना से जुड़े विभागों के जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही का खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है। संजय सागर नहर परियोजना के टेल क्षेत्र के ज्यादातर गांवों में रबी सीजन की गेहूं, चना, मसूर, सरसों आदि की फसलों की बोवनी 20 से 25 दिन पहले हो चुकी है। इन फसलों को सिंचाई के लिए पानी नहीं मिलने से नुकसान का खतरा मंडरा रहा है।

किसानों का कहना है कि समय पर सिंचाई नहीं की गई तो उत्पादन पर असर पड़ेगा। जानकारी के मुताबिक नटेरन सहित सेऊ, पट्टन, रानी खजूरी, निपानिया, नागौर, मूडरा, पीतांबर आदि गांव के किसान सिंचाई के लिए परेशान हो रहे हैं।

केस-1- झाड़ और घास में नहर ढूंढना भी मुश्किल
नटेरन क्षेत्र में मूडरा पीतांबर नहर की स्थिति यह है कि उसे ढूंढना भी मुश्किल है। नहर में झाड़ और घास के बीच नहर दिखाई ही नहीं दे रही है। इस माइनर की सफाई नहीं होने से यह स्थिति है।

केस 2- नहर का आधे पाइप का आधा हिस्सा मिट्टी के कारण दबा
पहाड़ी के पास निपाटिया गुजरी नहर का पाइप में काफी मिट्टी भरी पड़ी है। मिट्टी इतनी ज्यादा है कि आधा पाइप दिखाई ही नहीं दे रहा है। नहर की यह हालत साफ बता रही है कि जिम्मेदारों ने समय रहते सफाई नहीं की है।

केस-3- टूटी पड़ी है नहर, सीसी हिस्सा ही ढह गया
निपानियां के पास ही एक नहर काफी बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हुई है। नहर का सीसी का हिस्सा ही ढह गया है। इसके बावजूद भी जिम्मेदार विभाग ने समय रहते इसकी मरम्मत नहीं कराई।

आगे क्या… अब मिट्टी भरवाकर सुधार कर रहे, फूटने की आशंका
मुख्य नहरों और माइनरों की सफाई नहीं होने से बांध से जो पानी छोड़ा गया है वह आगे नहीं बढ़ पा रहा है। नहरों में जमी मिट्टी और झाड़-घांस की वजह से पानी रुक रहा है। इसके अलावा जहां जहां नहरें फूटी हुईं हैं वहां पानी बर्बाद हो रहा है। निपानिया के कृषक पीयूष श्रीवास्तव ने बताया कि उनके खेत के पास ही नहर फूटी पड़ी हुई है। उन्होंने बताया कि फूटी हुई नहरों पर कुछ जगह विभाग द्वारा लीपापोती कर जेसीबी से मिट्टी भरवाई जा रही है। उन्होंने बताया कि मिट्टी डालने से नहर का पानी आगे बड़ ने में दिक्कत होगी और मिट्टी वाली जगह पर फिर से नहर फूटने की आशंका है।

ट्यूबवेल से दे रहे पानी, जबकि 13250 हेक्टेयर में सिंचाई का रखा लक्ष्य
इस साल मानसून में अच्छी बारिश होने की वजह से संजय सागर बांध पूर्ण भराव हुआ है। इस बार बांध से सिंचाई का लक्ष्य करीब 13250 हेक्टेयर रकबे के लिए रखा गया है। दूसरी तरफ नहरों में पानी नहीं आने से नटेरन क्षेत्र के कई गांवों के किसान अपनी फसलों को बचाने के लिए ट्यूबवेल से सिंचाई करने को मजबूर हैं। निपानिया के कृषक मंसाराम मैना, अरविंद रघुवंशी सहित कई किसान ट्यूब वेल चलाकर सिंचाई कर रहे हैं। जबकि बिजली भी पर्याप्त नहीं मिलने से किसान दोहरी समस्या का सामना कर रहे हैं।