November 29, 2021

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अब भोपाल रेफर नहीं होंगे बच्चे, जिला अस्पताल में कम होगा लोड

मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने इसी महीने 3 नवंबर को विदिशा मेडिकल कालेज का दौरा किया था। उन्होंने विदिशा के मरीजों को भोपाल रेफर करने पर अधिकारियों को फटकार लगाई थी। उनका कहना था कि यह उनका ड्रीम प्रोजेक्ट है, इसलिए जिला अस्पताल में आने वाले गंभीर मरीजों को भोपाल रेफर करने की बजाय विदिशा मेडिकल काॅलेज में ही रेफर किया जाए। सीएम की फटकार के बाद विदिशा के शासकीय अटल बिहारी वाजपेयी मेडिकल काॅलेज में नया एसएनसीयू चालू कर दिया गया है। इसमें गंभीर नवजात शिशुओं का इलाज शुरू हो गया है।

अभी इसमें 2 गंभीर बच्चे भर्ती हैं जिन्हें जिला अस्पताल से रेफर किया गया है। मेडिकल काॅलेज की एसएनसीयू चालू होने से अब गंभीर बच्चों को भोपाल रेफर नहीं करना पड़ेगा। इससे अब जिला अस्पताल की एसएनसीयू का लोड भी कम हो जाएगा। इससे पेरेंट्स को राहत मिलेगी। इसके अलावा एक महीने के अंदर मेडिकल कालेज का नया गायनी डिपार्टमेंट भी चालू हो जाएगा। अभी यहां एनएचएम के तहत जननी सुरक्षा योजना का लाभ नहीं मिल रहा है। इस वजह से इसमें देरी हो रही है।

शुरुआत 15 वार्मर से, अभी 10 और लगेंगे
एसएनसीयू की इंचार्ज डा.नीति अग्रवाल ने बताया कि मेडिकल कालेज के चौथे फ्लोर पर न्यूनेटल इंटेसिव केयर यूनिट चालू कर दी गई है। इसमें फिलहाल जन्म से लेकर 28 दिन तक की अवधि के 2 गंभीर बच्चों का इलाज चल रहा है। अभी यहां नवजात शिशुओं के इलाज के लिए 15 वार्मर लगाए गए हैं। 10 वार्मर और लगाने की तैयारी चल रही है। यहां कुल 25 वार्मर में बच्चों का इलाज किया जा सकेगा।

15 बेड का पीआईसीयू
मेडिकल कालेज के सेकंड फ्लोर पर 15 बेड का एक नया पीडियाट्रिक्स इंटेसिव केयर यूनिट यानी पीआईसीयू भी चालू कर दिया गया है। इसमें जन्म के 28 दिन बाद के गंभीर नवजात शिशुओं को भर्ती कर इलाज की सुविधा दी गई है। इसमें भी अभी 5 बच्चों का इलाज चल रहा है।

10 दिन में 40 रेफर
पिछले 10 दिनों में जिला अस्पताल से पीडियाट्रिक्स, मेडिसिन, आर्थोपेडिक्स, सर्जरी आपरेशन, स्त्री रोग सहित अन्य विभागों के 40 मरीजों को मेडिकल कालेज में भर्ती कराया गया है। अब भोपाल रेफर नहीं करना पड़ता।
सीएम की फटकार के बाद शुरू हुई सुविधा, अभी पांच बच्चाें का चल रहा है इलाज

शिशु मृत्यु दर कम करने में मिलेगी मदद
नीति आयोग ने विदिशा को इंस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट यानी आकांक्षी जिलों की श्रेणी में रखा है। मेडिकल कालेज में एसएनसीयू की इंचार्ज डा.नीति अग्रवाल के मुताबिक विदिशा में नवजात शिशुओं की मृत्यु दर 54 है। यानी प्रति 1000 बच्चों के जन्म पर 54 बच्चों की मृत्यु होती है। मध्यप्रदेश की भी शिशु मृत्यु दर भी 54 है। जबकि देश में शिशु मृत्यु दर इससे कम 46 चल रही है। इस कारण यदि यहां गंभीर शिशुओं को समय पर इलाज मिल जाएगा तो मृत्यु दर कम करने में मदद मिलेगी।

24 घंटे तैनात रहता है मेडिकल स्टाफ
नियमानुसार एसएनसीयू में 24 घंटे मेडिकल स्टाफ तैनात रहता है। वर्तमान में विदिशा के एसएनसीयू में 4 डाक्टरों की पदस्थापना का आदेश है। वर्तमान में यहां डाक्टरों के चारों पद भरे हुए हैं। कोई पद रिक्त नहीं है। यही चारों डाक्टर 8 घंटे की शिफ्ट में ड्यूटी करते हैं। इनकी सहायता के लिए नर्सिंग स्टाफ भी तैनात रहता है।

सीटी स्कैन और एमआरआई की नहीं मिल रही सुविधा, प्राइवेट में जांच महंगी
विदिशा मेडिकल कालेज में आने वाले मरीजों को अभी सीटी स्केन और एमआरआई की सुविधा नहीं मिल रही है। इससे मरीजों को प्राइवेट डाक्टरों के पास जाकर महंगे दामों में सीटी स्केन और एमआरआई करवानी पड़ती है।

28 दिन तक के गंभीर शिशु होते हैं भर्ती
एसएनसीयू में जन्म से लेकर 28 दिन तक के क्रिटिकल हालत वाले बच्चों को भर्ती किया जाता है। इसमें कई बच्चे प्री-मेच्योर होते हैं। कई बच्चों को सांस लेने में दिक्कत होती है। इस कारण उन्हें वार्मर में रखा जाता है। वार्मर में ऐसे गंभीर बच्चों को आक्सीजन की सुविधा भी मिल जाती है। इससे कई बच्चों की जान बच जाती है। एसएनसीयू में जो संसाधन और चिकित्सा उपकरण होते हैं, उनकी फंडिंग एनएचएम यानी नेशनल हेल्थ मिशन द्वारा की जाती है। यह सुविधा मेडिकल कॉलेज में भी शुरू होने से लाभ मिलेगा।

हर महीने 120 से 200 तक बच्चे होते हैं भर्ती:, डॉक्टरों को होती है असुविधा
विदिशा जिला हास्पिटल के नए एसएनसीयू में वर्तमान में 24 वार्मर में नवजात शिशुओं को भर्ती कर उनका इलाज करने की सुविधा है लेकिन वर्तमान में यहां क्षमता से अधिक 49 बच्चों को भर्ती कर उनका इलाज किया जा रहा है। हर महीने औसतन यहां 120 से लेकर 200 की संख्या तक बच्चे भर्ती किए जाते हैं। क्षमता से ज्यादा बच्चे भर्ती होने की स्थिति में डाक्टरों को भी इलाज करने में असुविधा का सामना करना पड़ता है। वार्मर की संख्या से ज्यादा भर्ती बच्चों को रोटेशन में वार्मर में रखा जाता है। कुछ बच्चों को उनकी माताओं को बुलाकर उनके सुपुर्द कर दिया जाता है ताकि अन्य क्रिटिकल हालत वाले बच्चों को वार्मर और आक्सीजन में रखा जा सके।

गंभीर मरीजों का इलाज

  • मेडिकल काॅलेज में एसएनसीयू, पीआईसीयू को चालू कर दिया है। जल्द ही अन्य विभाग भी चालू किए जाएंगे। अगले एक महीने में महिला प्रसूति वार्ड भी चालू कर दिया जाएगा। अभी इससे एनएचएम से रजिस्ट्रेशन की प्रोसेस चल रही है ताकि डिलेवरी वाली महिलाओं को जननी सुरक्षा योजना का लाभ दिलाया जा सके। – डा.सुनील नंदीश्वर, डीन मेडिकल कालेज विदिशा

सिरोंज- बासौदा से आते समय दम तोड़ देते हैं बच्चे
विदिशा से सिरोंज की दूरी करीब 100 किमी है। इसी प्रकार विदिशा से गंजबासौदा भी करीब 60 किमी दूर है। ऐसे में यहां से गंभीर हालत वाले नवजात शिशुओं को विदिशा स्थित एसएनसीयू लाते समय 2 से 3 घंटे तक का समय लग जाता है। इसी समय रास्ते में विदिशा लाते समय कई गंभीर हालत वाले नवजात शिशु दम तोड़ देते हैं। यदि सिरोंज और गंजबासौदा में एसएनसीयू बनाकर नवजात शिशुओं का इलाज किया जाए तो डेथ रेट कम हो सकती है।