March 4, 2021

vedicexpress

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नायब कारीगरी का एक उदाहरण बनी उदयपुर की बनिया बावड़ी

“वैदिक एक्सप्रेस उदयपुर एक खोज “

गंजबासौदा :- क्षेत्र के ग्राम उदयपुर जिसके बिषय में कहा जाता है कि यह प्राचीन नगर 10वीं शताब्दी में परमार बंश के राजा उदयादित्य ने बसाया था लेकिन शताब्दियों बाद अब उदयपुर की पहचान केवल राजा उदयादित्य द्वारा निर्माण कराए गए भगवान नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर से ही होती है बाकी पूरी नगरी राजा का ऐतिहासिक किला नगर के चारों ओर के परकोटे दूर दूर तक कोसों दूर तक फैली किले की दीवारें पहाड़ों पर आज भी प्राचीन काल के अद्धभुत शिवलिंग के साथ साथ पहाड़ों ओर उनकी शिखरों पर बनी गुफाएं ओर 1 हजार वर्ष पुरानी उदयपुर नगरी ओर उसके  आसपास के क्षेत्रों में बनी ऐतिहासिक बावड़ी आज भी बनी हुई हैं लेकिन ये सब विलुप्त की स्तिथि हैं जैसे कहीं खो गया हो लेकिन जब महादेव की इक्षा हो तो कोई करे तो करे क्या अब ऐसा ही प्रतीत होता है जैसे अब उदयपुर खुद अपनी पहचान बताने के लिए उत्सुक हो क्योंकि बिगत एक माह में जो कुछ घट रहा है उसके बाद उदयपुर के कई ऐसे स्थान उजागर हो रहे हैं जो अब तक रोशनी से दूर थे जैसे वराहदेव का स्थान विगत दिनों इस स्थान के बिषज में पुरातत्व विभाग के जिला प्रभारी ड़ॉ अहमद अली ने कहा कि इस स्थल के नीचे धरती में य
निश्चित कोई प्राचीन मंदिर है जिसकी खुदाई के लिए प्रदेश में पुरातत्व विभाग के आयुक्त को लिखेंगे इस बिषय को अभी दो ही दिन गुजरे होंगे कि अब उदयपुर की बनिया बावड़ी ने अपनी पहचान बताई है ऐसा प्रतीत होता है कि अब उदयपुर खुद की स्वम् ही पहचान करा रहा हो |


*अद्धभुत कारीगरी है इस बावड़ी में*
वराहदेव के प्रकट स्थल के समीप ही एक बावड़ी बनी हुई है जिसे बनिया बावड़ी कहा जाता है ये नाम क्यों पड़ा ये तो वहाँ के नागरिकों को भी नही पता पूछने पर बताया कि बुजुर्गों से जो सुना वही बोलते आ रहे हैं इस बावड़ी के बारे में कहा जाता है कि ये 7 मंजिल नीचे तक है अब तक इसमें पानी रहता था इसलिये दिखती नही थी लेकिन इस बार कुदरत ही जैसे कुछ कराना चाह रही हो ईंट बालों ने इसका पानी खाली कर दिया जिसके कारण 1 हजार वर्ष पुरानी इस अनुपम अद्धभुत कलाकारी को देखने को मिला इस बावड़ी में 7 मंजिल नीचे तक दोनों तरफ से नीचे उतरने के लिए जीने बनाये गए हैं दो मंजिल नीचे बावड़ी में अंदर एक मंदिर बना हुआ है और पूरी बावड़ी में पत्थर की अद्धभुत कलाकारी का बेजोड़ नायब उदाहरण देखने को मिल रहा है मानो चीख चीख कर ये स्थल कह रहे हों कि हमें देखने उदयपुर एक बार अवश्य आयो हम हैं विश्व की धरोहर हम हैं पुरातत्व संपदा लेकिन वास्तविकता ये है कि इसे सहेज कर रखने की जिम्मेदारी हमारी है प्रशासन की है |