April 19, 2021

vedicexpress

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झलकारी के बलिदान को कलाकारों ने किया जीवंत

झांसी की रक्षा ओर राजकुमार की सुरक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दे देती हैं, “झलकारी”।
वीरांगना नाट्य महोत्सव में पीपल्स थियेटर गुप भोपाल की नाट्य प्रस्तुति-“वीरांगना झलकारी” आलेख ईलाशंकर गुहा निर्देशक-सिन्धु धौलपुरे द्वारा।
निर्देशकीय-भारत के गौरवपूर्ण इतिहास में कई ऐसे पात्र थे जिन्होंने अंग्रेजों से लोहा लेते हुए अपना सर्वोच्च बलिदान देश की स्वतंत्रता के लिए दे दिया।
उसी में से एक भूली बिसरी वीरांगना झलकारी बाई थी जो देखने में हुवाहु झांसी की रानी लक्ष्मीबाई की तरह दिखती थी ओर झांसी की रक्षा हेतु रानी लक्ष्मीबाई का भेष धारण करके अंग्रेजों को गुमराह किया ओर मरते दम तक अंग्रेजों से लड़ते-लड़ते झांसी की रक्षा हेतु शहीद हो गई। मेरी कोशिश हैं कि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में गुमनाम पात्रों को,जिनको इतिहास में उचित स्थान न मिल सका,उनके बलिदान को रंगमंच के माध्यम से सबको अवगत कराऊँ,इसी क्रम में मेरा यह प्रयास हैं।


वीरांगना झलकारी बाई का जन्म झाँसी के पास गांव भोजला में सदोवर सिंह ओर जमुना देवी के यहाँ 22 नवम्बर 1830 में हुआ था। नाटक की शुरुआत झलकारी के जन्म से होती हैं। बाल्यकाल में ही अपनी माँ को खो देने के बाद पिता सदोवर सिंह झलकारी को बचपन से ही एक वीर योध्दा की तरह पालते हैं,बड़ी होकर झलकारी का विवाह झांसी के सेनानायक पूरन कोरी से होता हैं।झलकारी की बहादुरी को देखकर रानी लक्ष्मीबाई उन्हें अपनी रानी दुर्गा महिला सेना में शामिल कर लेती हैं और अपनी छोटी बहन की तरह ही झलकारी को मान सम्मान देती हैं।झलकारी भी अपनी स्वामी भक्ति का परिचय देते हुए समय आने पर झाँसी की रक्षा के लिए रानी लक्ष्मीबाई का रूप धारण कर अंग्रेजों को गुमराह करते हुए लड़ाई करते समय शहीद हो जाती हैं।इस प्रकार झलकारी बाई ने अपना पूरा जीवन झाँसी की रक्षा के लिए समर्पित कर दिया।