January 18, 2022

vedicexpress

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100 करोड़ की सिक्योरिटी मनी जब्त, स्टॉक की जांच करेंगे कलेक्टर; होशंगाबाद के ठेकेदार पहुंचे हाईकोर्ट

राज्य सरकार ने भोपाल समेत 7 जिलों के रेत ठेके निरस्त कर दिए हैं। इन ठेका कंपनियों की सिक्योरिटी मनी करीब 100 करोड़ रुपए जब्त कर ली गई है। खनिज विभाग ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिया है। इसमें कहा गया है कि इन खदानों से निकाली गई रेत का ठेकेदारों द्वारा किए गए स्टॉक की जांच कलेक्टर करेंगे। ये कंपनियों पिछले तीन महीने से किश्त जमा नहीं कर रहे थे। सरकार द्वारा यह फैसला लेने से पहले ही प्रदेश की सबसे बड़ी रेत खदान का संचालन करने वाली कंपनी ने रिस्क एंड कास्ट के नियम समेत अन्य प्रतिबंधों के खिलाफ ठेकेदार ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी है।

खनिज विभाग के मुताबिक राॅयल्टी की राशि नियमित रूप से नहीं मिलने पर होशंगाबाद, भोपाल, खरगोन, बड़वानी, जबलपुर, दमोह और टीकमगढ़ की रेत खदानों के समूह के ठेके निरस्त कर दिए हैं। प्रदेश की सबसे बड़े रेत खदानों के समूह होशंगाबाद के ठेकेदार पर 63 करोड़ से अधिक की देनदारी थी।

होशंगाबाद की 118 रेत खदानों के समूह का ठेका 19 महीने में दूसरी बार निरस्त हुआ है। वर्ष 2019 में रेत खदानों की नीलामी में शामिल होकर तेलंगाना की पावरमैक कंपनी ने 217 करोड़ में ठेका लिया था, जिसे मई 2020 में निरस्त किया गया था। जनवरी 2021 में छत्तीसगढ़ की कंपनी आरके ट्रांसपोर्ट ने 262 करोड़ रुपए में यह ठेका लिया था।

ठेकेदार ने दिसंबर 2021 में खदान समर्पित करने का आवेदन तो दे दिया था, पर वह अक्टूबर 2021 से रायल्टी की नियमित किस्तों का भुगतान नहीं कर रहे थे। इसे देखते हुए ठेका निरस्त किया गया है। 65 करोड़ रुपए की सिक्योरिटी मनी जब्त कर ली गई है। साथ ही, ठेकेदार को ब्लैक लिस्ट में डाला गया है।

ठेकेदारों ने 39 में से 24 खदानें छोड़ीं
वर्ष 2019 में सरकार ने रेत खदानों के 39 समूह (जिला स्तर पर समूह) नीलाम किए थे। इनमें से आठ ठेकेदारों ने खदानें छोड़ दी हैं, तो 16 ठेकेदारों के ठेके निरस्त कर दिए गए हैं। इस तरह प्रदेश में वर्तमान में 15 जिलों की खदानों से ही रेत निकाली जा रही है। रतलाम, भिंड और पन्ना के ठेकेदार पहले खदानें सरेंडर कर चुके हैं।

बैतूल, देवास, ग्वालियर, नरसिंहपुर और डिंडौरी के दिसंबर में खदानें सरेंडर कर दी हैं। इसके अलावा भोपाल, होशंगाबाद, रायसेन, धार, आलीराजपुर, खरगोन, बड़वानी, शिवपुरी, जबलपुर, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़, मंदसौर, रीवा, राजगढ़ और शाजापुर की खदानें निरस्त की गई थीं।