June 27, 2022

vedicexpress

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भोपाल की 8 साल की बच्ची में ‘बुढ़ापा’:सिर के सारे बाल झड़े, त्वचा ढीली पड़ी; जानिए किस वजह से हुआ ऐसा?

कुछ साल पहले अमिताभ बच्चन की फिल्म ‘पा’ आई थी, जिसमें उन्होंने प्रोजेरिया बीमारी से पीड़ित एक बच्चे ‘ऑरो’ का किरदार निभाया था। भोपाल के शाहजहांनाबाद इलाके में भी ऐसा ही एक मामला सामने आया है। जहां 8 साल की गुंजन शाक्य, प्रोजेरिया की वजह से बुजुर्ग की तरह दिखती है। उसका सिर दिखने में बड़ा है, लेकिन पूरे बाल झड़ चुके हैं और त्वचा भी ढीली पड़ चुकी है। उसके सिर व हाथ-पैर में दर्द रहता है। अमेरिका की एक संस्था ने गुंजन के इलाज के लिए मदद की पेशकश की है।

अमेरिका की प्रोजेरिया रिसर्च फाउंडेशन संस्था ने गुंजन के पिता को लेटर लिखा है, और गुंजन के ब्लड सैंपल भेजने के लिए कहा है। जिसकी जांच के बाद उसके इलाज की व्यवस्था होगी। गुंजन के इलाज के लिए प्रयासरत सोशल एक्टिविस्ट डॉ. जीशान हनीफ ने बताया कि संस्था ने सैंपल ट्रांसपोर्टेशन के लिए फंड भी दिया है।

प्राइवेट अस्पताल में बनाया एक दिन का डॉक्टर
गुंजन पढ़ने में होशियार है। वह डॉक्टर बनना चाहती है। कुछ महीने पहले जब उसने यह बात डॉ. जीशान हनीफ को बताई, तो उसका ये सपना पूरा करते हुए उसे एक दिन का डॉक्टर बनाया गया। भोपाल में मोती मस्जिद के पीछे चहक हॉस्पिटल में गुंजन डॉक्टर बनकर पहुंची। उसके लिए खास डॉक्टर की यूनिफॉर्म बनवाई गई थी।

गुंजन के पिता गोपाल शाक्य मजदूरी करते हैं। गोपाल बताते हैं कि पहली क्लास में पढ़ रही गुंजन पढ़ने में तेज है। वह आम बच्चों से बड़ी दिखती है। वह डॉक्टर बनना चाहती है, लेकिन हमारे पास तो दो वक्त के खाने की व्यवस्था जैसे-तैसे हो पाती है। यदि सरकार मदद करे, तो गुंजन का सपना साकार हो सकता है।

एक दिन का डॉक्टर बनाने पर गुंजन का स्वागत किया गया।

एक दिन का डॉक्टर बनाने पर गुंजन का स्वागत किया गया।

मां की आंखों से छलके आंसू
गुंजन के इलाज के लिए अमेरिका से मदद की पेशकश आने के बाद गुंजन की मां की आंखों से आंसू छलक पड़े। उन्होंने कहा कि मेरी इच्छा है कि मेरी बेटी दूसरे बच्चों की तरह पढ़ाई लिखाई कर अपना जीवन जीए।

प्राइवेट अस्पताल ने गुंजन को एक दिन का डॉक्टर बनाया था।

प्राइवेट अस्पताल ने गुंजन को एक दिन का डॉक्टर बनाया था।

जानलेवा है प्रोजेरिया
प्रोजेरिया सिंड्रोम दुर्लभ और जानलेवा है। इसे बेंजामिन बटन के नाम से भी जाना जाता है। विशेषज्ञों के मुताबिक दुनिया में हर दो करोड़ लोगों में एक को ये बीमारी होती है। प्रोजेरिया रिसर्च फाउंडेशन के मुताबिक दुनियाभर में इस बीमारी से 350 से 400 बच्चे पीड़ित हैं।

क्यों होती है यह बीमारी?
एक्सपर्ट कहते हैं कि बच्चों में यह बीमारी लैमिन-ए-जीन में गड़बड़ी के कारण होती है। इस बीमारी के संकेत पहले से नहीं मिलते, यह अचानक हो जाती है। लेकिन, दो साल तक की उम्र में बच्चों में लक्षण दिखाई देने लगते हैं।

क्या हैं लक्षण?

  • बच्चों की लंबाई और वजन का कम होना
  • शरीर का कमजोर होना
  • सिर के बाल झड़ जाना
  • सिर का आकार बढ़ जाना
  • किसी बुजुर्ग व्यक्ति की तरह त्वचा का ढीला होना
  • होंठ पतले होना

कितनी खतरनाक है यह बीमारी
बच्चों की उम्र दो साल होने तक बीमारी का पता तो चल जाता है, लेकिन बड़ी दिक्कत ये है कि जल्द ही यह बीमारी मौत की ओर ले जाती है। बीमारी से पीड़ित की करीब 20 या 21 साल की उम्र में मौत हो जाती है।