June 27, 2022

vedicexpress

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पंचायत-निकाय चुनाव जून में; कमलनाथ बोले- कांग्रेस 27% OBC कैंडिडेट को टिकट देगी, वीडी शर्मा बोले- हम इससे ज्यादा देंगे

मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग ने कहा है कि नगरीय निकाय चुनाव जून में हो सकते हैं। दरअसल हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने बिना OBC आरक्षण के लोकल बॉडी इलेक्शन कराने का आदेश दिया था। जिसके बाद बुधवार को राज्य निर्वाचन आयोग की बैठक हुई। राज्य निर्वाचन आयुक्त बसंत प्रताप सिंह ने कहा- नगरीय निकाय चुनाव कराने के लिए हम आज ही तैयार हैं। 12 जून तक एक चुनाव कराया जाएगा। 30 जून तक दोनों चुनाव कराए जाएंगे। नगरीय निकाय चुनाव कराना आज की तारीख में आसान है, आरक्षण और परिसीमन दोनों हैं। पंचायत चुनाव में आरक्षण बाकी है। आज पंचायत विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक की है। आयुक्त ने कहा कि हर हाल में जून में चुनाव होंगे। चुनाव की तैयारियों के लिए कलेक्टरों को भी निर्देश दिए हैं।

मध्यप्रदेश में लोकल बॉडी इलेक्शन में OBC रिजर्वेशन को लेकर सियासत गर्मा गई है। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा है कि कांग्रेस पार्टी ने तय किया है कि चुनाव में हम 27% टिकट OBC कैंडिडेट्स को देंगे। इससे एक कदम आगे जाते हुए BJP प्रदेशाध्यक्ष वीडी शर्मा ने कहा है कि 27% क्या, योग्यता रखने वाले OBC कार्यकर्ताओं को हम 27% से ज्यादा सीटों पर टिकट देंगे।

कांग्रेस की मांग- OBC को 27% आरक्षण देने के लिए विधानसभा का विशेष सत्र बुलाए सरकार
कांग्रेस ने OBC आरक्षण को लेकर BJP और शिवराज सरकार पर बड़ा हमला बोला। कहा कि दोनों RSS के एजेंडे को आगे बढ़ाना चाहते हैं। सुप्रीम कोर्ट में सरकार ने पक्ष मजबूती से नहीं रखा। इसी का परिणाम है कि सुप्रीम कोर्ट ने OBC आरक्षण के बिना पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव कराने का फैसला दिया। पूर्व मंत्री कमलेश्वर पटेल ने कहा कि यदि BJP और शिवराज सरकार की OBC को आरक्षण देने की मंशा है तो विधानसभा का विशेष सत्र तत्काल बुलाया जाए। यहां से संविधान में संशोधन के लिए प्रस्ताव के लिए भेजिए। केंद्र में भी बीजेपी की सरकार है। कांग्रेस ने मांग रखी कि सिर्फ मध्यप्रदेश ही नहीं, पूरे देश मे ओबीसी को 27% आरक्षण की व्यवस्था की जाए। जिस तरह से सामान्य वर्ग को 10% आरक्षण देने के लिए भारतीय संविधान में संशोधन किया, उसी तरह पिछड़े वर्ग को भी आरक्षण देने BJP सरकार संशोधन विधेयक लेकर आए। पटेल ने कहा कि ऐसा प्रावधान संशोधन करके किया जा सकता है। ऐसा करते हैं तो न्यायालय का जोर नहीं चलेगा।