June 17, 2021

vedicexpress

vedicexpress

सूर्य ग्रहण में मंत्र जप करे और जीवन कोआनंदमय बनाये

सूर्य ग्रहण में मंत्र जप करे और जीवन कोआनंदमय बनाये

साल 2021 का पहला सूर्य ग्रहण 10 जून को लगेगा . इस बार सूर्य ग्रहण ज्येष्ठ मास की कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को लगेगा. सूर्य ग्रहण दोपहर 1 बजकर 42 मिनट से शुरू होकर शाम के 6 बजकर 41 मिनट पर समाप्त होगा. ये सूर्य ग्रहण उत्तरी अमेरिका, यूरोप, एशिया में आंशिक रूप में दिखाई देगासाल का पहला सूर्य ग्रहण कल 10 जून को दिखेगा। नॉर्थ अमेरिका, यूरोप और एशिया में इस ग्रहण को साफ-साफ देखा जा सकेगा। भारत में यह ग्रहण सूर्यास्त के पहले लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश में दिखाई देगा। हालांकि यह ग्रहण भारत में आंशिक तौर पर ही दिखेगा। असली रिंग ऑफ फॉयर का नजारा तो विदेशों में देखा जा सकेगा।लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश में यह केवल सूर्यास्त के पहले ही देखा जा सकेगा।
यह ग्रहण भारत में नहीं लग रहा है इसलिए इसका कोई सूतक काल मान्य नहीं होगा। इसलिए इस ग्रहण के कारण पूजा पाठ, दान पुण्य पर कोई रोक नहीं होगी। हिंदू पंचांग के अनुसार, साल के पहले सूर्यग्रहण के दिन ज्येष्ठ मास की अमावस्या, शनि जयंती और वट सावित्री व्रत भी है। सूर्यग्रहण के दिन धृति और शूल योग भी बनेगा। जानें क्यों लगता है सूर्य ग्रहण, क्या है राहु-केतु की कथा
सूर्य ग्रहण और राहू केतु की पौराणिक कथा.
साल का पहला सूर्य ग्रहण दोपहर 1 बजकर 42 मिनट से शुरू होकर शाम के 6 बजकर 41 मिनट तक रहेगा. इस बार भारत में ग्रहण का सूतक काल मान्य नहीं है
यह पूर्ण सूर्य ग्रहण है जिसमें चंद्रमा पूरी तरह से पृथ्वी को ढक लेगा. ऐसे में केवल सूर्य की बाहरी परत ही दिखाई देगी. ग्रहण में सूर्य के लगभग 94 फीसदी भाग को चंद्रमा ग्रास लेगा यानी कि ग्रहण लगा देगा. पूर्ण सूर्य ग्रहण होने की वजह से दिन में अंधेरा छा जाएगा. इस बार सूर्य ग्रहण कोरोना (Corona) काल में पड़ रहा है. भारत में ये ग्रहण आंशिक रूप से ही होगा. इसलिए ग्रहण काल मान्य नहीं होगा. आइए जानते हैं सूर्य ग्रहण और राहू केतु का संबंध और पौराणिक कथा..

सूर्य ग्रहण और राहू केतु की पौराणिक कथा

समुद्र मंथन की पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब दैत्यों ने तीनों लोक पर अपना अधिकार जमा लिया था, तब देवताओं ने भगवान विष्णु से मदद मांगी थी. तीनों लोक को असुरों से बचाने के लिए भगवान विष्णु का आह्वान किया गया था. तब भगवान विष्णु ने देवताओं को क्षीर सागर का मंथन करने के लिए कहा और इस मंथन से निकले अमृत का पान करने के लिए कहा. भगवान विष्णु ने देवताओं को चेताया था कि ध्यान रहे अमृत असुर न पीने पाएं क्योंकि तब इन्हें युद्ध में कभी हराया नहीं जा सकेगा.भगवान के कहे अनुसार देवताओं मे क्षीर सागर में मंथन किया. समुद्र मंथन से निकले अमृत को लेकर देवता और असुरों में लड़ाई हुई. तब भगवान विष्णु ने मोहनी रूप धारण कर एक तरफ देवता और एक तरफ असुरों को बिठा दिया और कहा कि बारी-बारी सबको अमृत मिलेगा. यह सुनकर एक असुर देवताओं के बीच भेष बदल कर बैठ गया, लेकिन चंद्र और सूर्य उसे पहचान गए और भगवान विष्णु को इसकीजानकारी दी, लेकिन तब तक भगवान उस अमृत दे चुके थे.
अमृत गले तक पहुंचा था कि भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से असुर के धड़ को सिर से अलग कर दिया, लेकिन तब तक उसने अमृतपान कर लिया था. हालांकि, अमृत गले से नीच नहीं उतरा था, लेकिन उसका सिर अमर हो गया. सिर राहु बना और धड़ केतु के रूप में अमर हो गया. भेद खोलने के कारण ही राहु और केतु की चंद्र और सूर्य से दुश्मनी हो गई. कालांतर में राहु और केतु को चंद्रमा और पृथ्वी की छाया के नीचे स्थान प्राप्त हुआ है. उस समय से राहु, सूर्य और चंद्र से द्वेष की भावना रखते हैं, जिससे ग्रहण पड़ता है
. सूर्य ग्रहण वैज्ञानिक परिप्रेक्ष
सूर्य ग्रहण एक तरह का ग्रहण है जब चन्द्रमा, पृथ्वी और सूर्य के मध्य से होकर गुजरता है तथा पृथ्वी से देखने पर सूर्य पूर्ण अथवा आंशिक रूप से चन्द्रमा द्वारा आच्छादित होता है। फिर वह सूरज की कुछ या सारी रोशनी रोक लेता है जिससे धरती पर साया फैल जाता है। इस घटना को सूर्य ग्रहण कहा जाता है।वैज्ञानिक दृष्टिकोण में सूर्य ग्रहण
ग्रहण का आध्यात्मिक महत्त्व भी है और वैज्ञानिकों के लिए यह अवसर किसी उत्सव से कम नहीं होता। क्योंकि ग्रहण ही वह समय होता है जब ब्राह्मण्ड में अनेकों विलक्षण एवं अद्भुत घटनाएँ घटित होतीं हैं जिससे कि वैज्ञानिकों को नये नये तथ्यों पर कार्य करने का अवसर मिलता है। 1968 में लार्कयर नामक वैज्ञानिक नें सूर्य ग्रहण के अवसर पर की गई खोज के सहारे वर्ण मण्डल में हीलियम गैस की उपस्थिति का पता लगाया था।

आईन्स्टीन का यह प्रतिपादन भी सूर्य ग्रहण के अवसर पर ही सही सिद्ध हो सका, जिसमें उन्होंने अन्य पिण्डों के गुरुत्वकर्षण से प्रकाश के पडने की बात कही थी। चन्द्रग्रहण तो अपने सम्पूर्ण तत्कालीन प्रकाश क्षेत्र में देखा जा सकता है किन्तु सूर्यग्रहण अधिकतम 10 हजार किलोमीटर लम्बे और 250 किलोमीटर चौड़े क्षेत्र में ही देखा जा सकता है। सम्पूर्ण सूर्यग्रहण की वास्तविक अवधि अधिक से अधिक 11 मिनट ही हो सकती है उससे अधिक नहीं। संसार के समस्त पदार्थों की संरचना सूर्य रश्मियों के माध्यम से ही सम्भव है। यदि सही प्रकार से सूर्य और उसकी रश्मियों के प्रभावों को समझ लिया जाए तो समस्त धरा पर आश्चर्यजनक परिणाम लाए जा सकते हैं। सूर्य की प्रत्येक रश्मि विशेष अणु का प्रतिनिधित्व करती है और जैसा कि स्पष्ट है, प्रत्येक पदार्थ किसी विशेष परमाणु से ही निर्मित होता है। अब यदि सूर्य की रश्मियों को पूँजीभूत कर एक ही विशेष बिन्दु पर केन्द्रित कर लिया जाए तो पदार्थ परिवर्तन की क्रिया भी सम्भव हो सकती
सूर्य ग्रहण का रााशियों पर प्रभाव
मेष
इस राशि के जातकों को सावधान रहने की जरूरत है। बिल्कुल भी क्रोध न करें। धन का गलत प्रयोग हानि पहुंचा सकता है। गलत कदमों से बदनामी का भी खतरा है।
वृष
अपनी ऊर्जा को सही और सकारात्मक दिशा में उपयोग करने का प्रयास करेंगे तो किया गया कार्य भी सफल होगा। राहु वृष राशि में गोचर कर रहा है, इसलि सूर्य ग्रहण के दौरान विशेष सावधान रहने की जरूरत है। सेहत का विशेष ख्याल रखें। 10 जून को सूर्य ग्रहण इस राशि में ही लगने वाला है।
मिथुन
गलत संगति में पड़ने पर हानि उठानी पड़ सकती है। गलत कार्यों से दूरी बनाकर रखें तो फायदे में रहेंगे। अचानक लाभ या हानि की स्थिति निर्मित हो सकती है। धन के व्यय में भी सावधानी बरते। संबंधों को बेहतर बनाए रखने का प्रयास करें।
कर्क
मन को हमेशा शांत रखने की कोशिश करें। मधुर वाणी से ही कई विपत्तियों को दूर किया जा सकता है। विवाद की स्थिति में धैर्य बनाकर रखें। अपने दुश्मनों के प्रति हमेशा सतर्क रहें
सिंह
गरीबों की मदद करने का प्रयास करें। किसी का भी अहित करने का विचार मुसीबत में डाल सकता है। प्रेम और विनम्रता की स्थिति अचानक भी दिला सकती है। धार्मिक कार्यों में रूचि बढ़ सकती है।
कन्या
इस राशि के जातकों को अपनी सेहत को लेकर सावधान रहने की जरूर है। कर्ज लेने और देने की स्थिति से परहेज करना चाहिए, इस कारण से विवाद की स्थिति निर्मित हो सकती है। परिवार के सदस्यों से संंबंधों को मजबूत और मधुर बनाने का प्रयास करें। पारिवारिक प्रेम से हर दुविधा दूर होगी।
तुला
किसी भी विपत्ति की स्थिति में जल्दबाजी में कोई निर्णय न लें। अपने जीवन साथी की भावनाओं का ख्याल रखें। तनाव और कलह की स्थिति दूर रहने करने की कोशिश करें। गरीब और जरूरतमंद लोगों की मदद करने पर सूर्य ग्रहण के दुष्प्रभावों को दूर कर सकते हैं।
वृश्चिक
मन में हमेशा सकारात्मक विचार लाए। नकारात्मक विचार नुकसान पहुंचा सकते हैं। किसी का अपमान न करें और वाणी में मधुरता लेकर आएं। अपनी संतान के स्वास्थ्य को लेकर चिंता हो सकती है, लेकिन इस स्थिति में संयम बरते। अपने परिवार के सदस्यों की सेहत का ध्यान रखें। स्वच्छता के नियमों का सख्ती से पालन करें।
धनु
ज्ञान और शिक्षा के अर्जन से शुभ फल पाया जा सकता है। विद्यार्थियों को कठिन परिश्रम करना होगा। धन की बचत करें, भविष्य की स्थिति को ध्यान में रखते हुए निवेश करने का विचार करें। मेहनत का फल अवश्य मिलेगा।
मकर
मकर राशि वालों में शनि ग्रह वक्री होकर गोचर कर रहे हैं, इस कारण से सेहत का विशेष ख्याल रखें। लोगों का सम्मान करें और निर्णय लेने से पहले सभी पहलूओं पर विचार अवश्य करें।
कुंभ
क्रोध और अहंकार पर काबू रखें अन्यथा दुश्मन आपको हानि पहुंचा सकते हैं। अपनी योजनाओं को लेकर सतर्कता बरतें। अपने माता-पिता की ज्यादा से ज्यादा सेवा करें। अपने मन में नकारात्मक विचार न आनें दें, अन्यथा विपत्ति के दौरान कमजोर होंगे।.
मीन
आपके साहस में वृद्धि होगी। कोई भी बड़ा फैसला लेने से पहले परिवार के बुजुर्गों से परामर्श अवश्य करें। साथ ही विषय विशेषज्ञ की भी सलाह जरूर लें। गलत फैसले भी हो सकते है, इसलिए सावधान रखने प्रयास करें। अपने जीवन साथी की सेहत का ध्यान रखें।
ग्रहण में मंत्र जप का विशेष महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण में मंत्र जप का विशेष महत्व है। तांत्रिक क्रियाओं के लिए भी यह समय अत्यंत क्रियाशील माना गया है। इस लेख में मैं पांच ऐसे चमत्कारिक और आसान मंत्रों के बारे में जानकारी दे रहा हूं, जिन्हें साधारण गृहस्थ व्यक्ति भी अपने घर के पूजा स्थान में बैठकर कर सकता है। ग्रहण काल के दौरान इन पांच में से किसी भी एक मंत्र का जाप करने से न सिर्फ ग्रहण के बुरे प्रभावों से बचा जा सकता है, बल्कि पारिवारिक सुख, सौभाग्य, आर्थिक समृद्धि भी पाई जा सकती है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मंत्रों का जाप करने से व्यक्ति के अंदर सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. मन के दुख, द्वेष, पाप, भय, शोक जैसे नकारात्मक चीजों का अंत हो जाता है. साथ ही मनुष्य मानसिक तौर पर जागृत हो जाता है. आपको बता दें कि प्रत्येक दिन गायत्री मंत्र का जाप करना चाहिए. आपको इसका अद्भुत लाभ देखने को मिलेगा. आइए आपको बताते हैं कि गायत्री मंत्र का जाप किस समय करना चाहिए और इसका अर्थ क्या होता है.
रोज करें गायत्री मंत्र का जाप, मिलेंगे ये 5 बड़े फायदे
कहते हैं कि गायत्री मंत्र के जाप से दुख और दरिद्रता का नाश होता है.
मान्यता है कि गायत्री मंत्र जाप से मन शांत और एकाग्र रहता है. मुखमंडल पर चमक आता है.
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मंत्रों का जाप करने से व्यक्ति के अंदर सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. मन के दुख, द्वेष, पाप, भय, शोक जैसे नकारात्मक चीजों का अंत हो जाता है. साथ ही मनुष्य मानसिक तौर पर जागृत हो जाता है. आपको बता दें कि प्रत्येक दिन गायत्री मंत्र का जाप करना चाहिए. आपको इसका अद्भुत लाभ देखने को मिलेगा. आइए आपको बताते हैं कि गायत्री मंत्र का जाप किस समय करना चाहिए और इसका अर्थ क्या होता है.

गायत्री मंत्र
ॐ भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात्।

गायत्री मंत्र का अर्थ
सृष्टिकर्ता प्रकाशमान परामात्मा के तेज का हम ध्यान करते हैं, वह परमात्मा का तेज हमारी बुद्धि को सन्मार्ग की ओर चलने के लिए प्रेरित करे.
गायत्री मंत्र जाप के फायदे

-कहते हैं कि गायत्री मंत्र के जाप से दुख और दरिद्रता का नाश होता है, संतान की प्राप्ति होती है.

-मान्यता है कि गायत्री मंत्र जाप से मन शांत और एकाग्र रहता है. मुखमंडल पर चमक आता है.
-किसी भी कार्य में सफलता प्राप्त करने के लिए गायत्री मंत्र का जाप किया जा सकता है.

-शिव गायत्री मंत्र का जाप करने से पितृदोष, कालसर्प दोष, राहु-केतु तथा शनि की पीड़ा से मुक्ति मिलती है.

-शिव गायत्री मंत्र: ॐ तत्पुरुषाय विदमहे, महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्र: प्रचोदयात्.

-नारियल का बुरा और घी का हवन गायत्री मंत्र के सा​थ करने से शत्रुओं का नाश होता है.

-कहते हैं कि स्मरण शक्ति को बढ़ाने के लिए 108 बार गायत्री मंत्र का जाप करना चाहिए
गायत्री मंत्र जाप के फायदे

-कहते हैं कि गायत्री मंत्र के जाप से दुख और दरिद्रता का नाश होता है, संतान की प्राप्ति होती है.

-मान्यता है कि गायत्री मंत्र जाप से मन शांत और एकाग्र रहता है. मुखमंडल पर चमक आता है.

-किसी भी कार्य में सफलता प्राप्त करने के लिए गायत्री मंत्र का जाप किया जा सकता है.

-शिव गायत्री मंत्र का जाप करने से पितृदोष, कालसर्प दोष, राहु-केतु तथा शनि की पीड़ा से मुक्ति मिलती है.

-शिव गायत्री मंत्र: ॐ तत्पुरुषाय विदमहे, महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्र: प्रचोदयात्.

-नारियल का बुरा और घी का हवन गायत्री मंत्र के सा​थ करने से शत्रुओं का नाश होता है.

-कहते हैं कि स्मरण शक्ति को बढ़ाने के लिए 108 बार गायत्री मंत्र का जाप करना चाहिए
ज्योतिष के अनुसार चंद्रमा को मन का कारक माना गया है। धर्म शास्त्रों में सूर्य के समान चंद्रमा की भी प्रतिष्ठा मानी गई है। चंद्रमा शुभ फल प्रदान करने वाले ग्रहों में से हैं, इनकी मजबूत या कमजोर स्थिति सीधे व्यक्ति के मन को प्रभावित करती है। यदि चंद्रमा की स्थिति कमजोर होत तो व्यक्ति का मनोबल कमजोर होने लगता है वह मानसिक अवरोधों से ग्रस्त हो सकता है। जिससे व्यक्ति के मन में नकारात्मक विचार उत्पन्न होने लगते हैं। जो लोग बहुत भावुक होते हैं उनपर चंद्रमा की कमजोर स्थिति का बहुत ज्यादा प्रभाव पड़ता है। चंद्रमा को मजबूत बनाने और मानसिक विकारो को दूर करने के लिए चंद्रमा के मंत्र का जाप करना बहुत शुभफल दायी रहता है। तो चलिए जानते हैं चंद्रमा का मंत्र और विधि…
चंद्रमा को मजबूत बनाने के लिए इस मंत्र का जाप ध्यान लगाकर करना चाहिए। इससे मानसिक शांति का अनुभव होने के साथ आपके आर्थिक और सामाजिक पक्ष को भी बल मिलता है। इस मंत्र के जाप से परिस्थितियों में तालमेल बैठाने के लिए व्यक्ति का मन प्रबल होता है। इसके साथ ही स्मरण शक्ति भी मजबूत होती है। ये मंत्र इस प्रकार से है।

श्वेतः श्वेताम्बरधरः श्वेताश्वः श्वेतवाहनः।
गदापाणि द्विर्बाहुश्च कर्तव्योः वरदः शशिः।
मंत्र विधि-
इस मंत्र को प्रातः ब्रह्म मुहूर्त और प्रदोषकाल में करना चाहिए इससे अधिक लाभ प्राप्त होता है। 
इस मंत्र का जाप भगवान शिव की प्रतिमा के समक्ष ध्यान करना श्रेष्ठकर रहता है। 
जिस दिन आपको मंत्र जाप करना हो उस दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर मंत्र का जाप करें। 
यदि प्रतिदिन जाप नहीं कर सकते हैं तो सोमवार का दिन इसके लिए सही रहता है।
त्र जाप के लाभ-
चंद्रमा के इस मंत्र का जाप करने से मानसिक शांति प्राप्ति होती है जिससे आपको तनाव से छुटकारा मिलता है।

विद्यार्थियों के लिए यह मंत्र बहुत लाभकारी है। जिन विद्यार्थियों की स्मरण शक्ति कमजोर हो उन्हें इस मंत्र का जाप करना चाहिए। इससे स्मरण शक्ति मजबूत होती है।
१० जून २०२१ के सूर्य ग्रहण का लाभ लेने के लिए आप सभी मंत्र जप ध्यान करे जिससे अधिक से अधिक लाभ आप को प्राप्त हो। ॐ ॐ ॐ
शांति


पंडित अजय कुमार चौबे(MBA MSC MED ASTRO MEDITATION EXPERT AND १५ YEARS GAYATRI SHADHAK )
गोरखपुर
M N 9838760378